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सोमवार, 30 अप्रैल 2018

4:32 pm

लाईफ का कोई ‘रि-सेट’ बटन नहीं होता है, प्रत्येक व्यक्ति का जीवन अमूल्य है : जी.पी. सिंह

लाईफ का कोई ‘रि-सेट’ बटन नहीं होता है, प्रत्येक व्यक्ति का जीवन अमूल्य है : जी.पी. सिंह

श्री जी.पी. सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग रेंज के आतिथ्य में सड़क सुरक्षा सप्ताह के अंतर्गत दिनांक 23 अपै्रल से 30 अप्रैल 2018 तक यातायात पुलिस भिलाई-दुर्ग द्वारा आयोजित 29वां सड़क सुरक्षा सप्ताह समारोह का समापन सेक्टर-4 स्थिति एस.एन.जी. स्कूल, भिलाई के इंडोर आडिटोरियम में किया गया। 

श्री सिंह द्वारा इस अवसर पर यातायात निर्देशिका का विमोचन किया गया एवं इस समारोह के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं एवं यातायात के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वांलेटियरों को पुरूस्कृत किया गया।

श्री सिंह द्वारा अपने उद्बोधन में सबसे पहले पुलिस अधीक्षक एवं उनकी टीम को यातायात प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते हुये सड़क दुर्घटनाओं के राष्ट्रीय आंकड़ों की तुलना में इस वर्ष जिला दुर्ग में 8 प्रतिशत की कमी आने पर सराहना की गई एवं यातायात के प्रबंधन में लगे प्रत्येक स्टाॅफ की प्रशंसा की गई जो कड़ी धूप, बारिश व विपरीत परिस्थितियों में डटकर अपनी ड्यूटी का निर्वहन कर रहे हैं। 

श्री सिंह द्वारा बताया गया कि वर्ष 2016-17 में राष्ट्रीय स्तर पर हुये सड़क दुर्घटनाओं के कुल 4,80,652 प्रकरणो में से 1,50,785 सड़क दुर्घटना से मृत्यु के प्रकरण थे। इस तरह प्रतिदिन 413 आमजन की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में होती है, जिसकी संख्या प्रतिघंटे के हिसाब से 17 है। इन दुर्घटनाओं का मुख्य कारण तेज रफ्तार वाहन चालन, ओव्हर टेकिंग, शराब का सेवन कर वाहन चालन, तथा वाहन चालन के समय मोबाईल पर बात करना आदि हैं। श्री सिंह द्वारा इस प्रकार की मृत्यु पर ध्यान आकृष्ट किया गया कि यदि जम्बो जेट विमान दुर्घटनाग्रस्त हो जाये तो उस घटना पर होने वाली मौतों पर एवियेशन विभाग स्तर पर जांच के प्रावधान व राष्ट्रीय स्तर पर जांच समितियां गठित होती है किन्तु प्रतिदिन सड़क दुर्घटना से होने वाली करीब 413 मृत्यु के आंकड़े पर समाजिक रूप से गंभीरता नहीं दिखती है। यही नहीं देश भर में क्राईम/मर्डर से होने वाली मृत्यु की तुलना में भी सड़क दुघटनाओं के आंकड़े करीब 4 गुना अधिक है जो अत्यंत गंभीर विषय है।

यातायात प्रबंधन के क्षेत्र में काफी एजेंसियां कार्य कर रही है, जिनके मध्य आपस में सामंजस्य की आवश्यकता है, जिस हेतु श्री सिंह द्वारा 5-E's का सिद्धांत बताया, जिनमें Enforcement, Education, Engineering, Enviornment & Emergency Care शामिल है, को लागू कर यातायात के क्षेत्र में उत्कृष्ट व कुशल प्रबंधन लाया जा सकता है। Enviornment के अंतर्गत हमें सड़क सुरक्षा विषय पर सामाजिक रूप से एक अनुकूल वातावरण बनाना होगा, वहीं म्उमतहमदबल ब्ंतम के तहत सड़क दुर्घटना में व्यक्ति की समय रहते हुये चिकित्सकीय सुविधा देकर जान बचाना है। पुलिस के संकल्प अनुसार इस महत्वपूर्ण कार्य में मदद करने वाले व्यक्ति से पुलिस की पूछताछ नहीं होगी। 

श्री सिंह द्वारा बताया गया कि दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के लिये दुर्घटना के तत्काल बाद का कुछ समय Golden Hour होता है, जिसमें सही चिकित्सकीय सुविधा देकर जान बचाई जा सकती है। अतः दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को बेहतर फस्र्ट एड सुविधा देने हेतु यातायात के पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिये जाने हेतु सुझाव दिया गया जिसके लिये कुछ नामी अस्पताल प्रशिक्षण देने हेतु सहमत हैं। इस हेतु पुलिस अधीक्षक को आवश्यक कार्यवाही करते हुये कार्यशाला का आयोजन करने हेतु निर्देशित भी किया गया।

श्री सिंह द्वारा यातायात सुरक्षा समारोह सप्ताह में उपस्थित सभी गणमान्य नागरिक, विभिन्न स्कूल के शिक्षकों एवं बच्चों व अन्य विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों तथा समाजसेवी संस्थाओं के स्वयं-सेवकों को ‘ब्रांड एम्बेसडर’ के रूप में कार्य करने एवं विभिन्न स्थलों, मोहल्लों व संस्थाओं में जाकर आमजन को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक कर इस मिशन से जोड़ने व  सहयोग करने हेतु आह्वान किया गया।

अंत में श्री सिंह ने अपने उद्बोधन में बताया कि लाईफ का कोई ‘रि-सेट’ बटन नहीं होता है, प्रत्येक व्यक्ति का जीवन अमूल्य है। सड़क दुर्घटना से होने वाली मौत से एक पूरा परिवार प्रभावित होता है। अतः इस विषय पर आमजन को सावधानी बरतने एवं गंभीर होने की आवश्यकता बताई है।

सड़क सुरक्षा सप्ताह समापन के अवसर पर जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक व अन्य अधिकारी तथा स्कूल के छात्र-छात्रायें व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

सड़क सुरक्षा सप्ताह समारोह के समापन उपरांत श्री सिंह द्वारा सिविक सेंटर, भिलाई में स्थित ट्रैफिक पार्क का निरीक्षण किया गया एवं ट्रैफिक पार्क को व्यवस्थित कर पुनः प्रारंभ करने की कार्यवाही हेतु पुलिस अधीक्षक, दुर्ग को निर्देशित किया गया।

शुक्रवार, 30 मार्च 2018

1:00 am

माननीय मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह द्वारा आज दिनांक 29/03/2018 को सिटीजन काॅप - मोबाईल एप्लीकेशन के अपग्रेटेड वर्जन का शुभारंभ किया गया।

माननीय मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने सिटीजन काॅप - मोबाईल एप्लीकेशन के अपग्रेटेड वर्जन का शुभारंभ किया 

माननीय मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह द्वारा आज दिनांक 29/03/2018 को सिटीजन काॅप - मोबाईल एप्लीकेशन के अपग्रेटेड वर्जन का शुभारंभ किया गया। आमजन की शिकायत रहती है कि उन्हें छोटे-छोटे काम के लिए थाना के चक्कर काटना पडता है जिससे समय की अनावश्यक बरबादी होती है। इन परेशानियों को देखते हुए पुलिस द्वारा टेक्नाॅलाजी का उपयोग कर नई पहल की गई है। सिटीजन काॅप पर की गई हर शिकायत रिकार्ड में रहती है और विशेष रूप से गोपनीयता का ध्यान रखा जाता है। महिलाओं, बच्चों एवं कमजोर वर्ग से जुड़े व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में यह मोबाईल एप्प अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। ‘‘सिटीजन काॅप’’ अपने नाम के अनुरूप इस मोबाइल एप्प की मदद से कोई भी आम-नागरिक बिना अपनी पहचान जाहिर किये, अपने आसपास हो रहे गैर कानूनी कार्यों, अपराध, किसी घटना/दुर्घटना की जानकारी पुलिस को दे सकते हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में पुलिस की त्वरित सहायता भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें स्वयं पुलिस थाना अथवा किसी पुलिस अधिकारी तक जाने की आवश्यकता नहीं होगी वे स्वयं ही एक पुलिस काॅप की भांति जनसुरक्षा सुनिश्चित करने में अपना महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं।



ज्ञातव्य हो कि सिटीजन काॅप - मोबाईल एप्लीकेशन का दिनांक 08/09/2015 को माननीय मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह द्वारा तत्समय श्री जीपी सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, रायपुर रेंज के पहल पर रायपुर संभाग के 05 जिलों रायपुर, धमतरी, महासमुन्द, बलौदाबाजार एवं गरियाबंद में लाॅन्च किया गया। सिटीजन काॅप को कोई भी व्यक्ति Google play store अथवा Apple app store से अपने मोबाइल में Free download कर उपयोग कर सकता है। इस एप्लीकेशन को FICCI, New Delhi द्वारा 05/05/2016 को Smart Policing Award - 2016 से सम्मानित किया गया है साथ ही इंडिया-टूडे व एचपी के माध्यम से दिनांक 27/05/2016 को माननीय मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह द्वारा The Digital India Conclave – Digital Trailblazers Award - 2016 से सम्मानित किया गया तथा Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) Govt of India, New Delhi द्वारा दिनांक 19/12/2016 को Digital India Awards – 2016 से सम्मानित किया गया। विदित हो कि इस एप्प के माध्यम से  लगभग 01 माह के भीतर 70 से अधिक चोरी/गुम मोबाईल रिकवर कर संबंधित मोबाइल मालिकों को वापस उपलब्ध कराए गए हैं, जो कि पुलिस के विशेष उपलब्धियों में से एक है।
यहां उल्लेखनीय है कि यह एप्लीकेशन छत्तीसगढ़ के 11 जिलों में भिन्न-भिन्न अवधियों से प्रभावी है, मार्च-2018 की स्थिति में कुल 74,642 उपयोगकर्ता है। इस एप्प के माध्यम से पुलिस को 6,121 शिकायतें/सूचनायें प्राप्त हुई है, जिसमें से 3,495 शिकायतों/सूचनाओं पर कार्यवाही करते हुए 2,145 शिकायतकर्ताओं को सीधे लाभ पहुंचाया गया है, शेष पर कार्यवाही की जा रही है जबकि 2,271 सूचनाएं कार्यवाही योग्य नहीं है। इसके अलावा एस.ओ.एस. के माध्यम से आम-नागरिको, विशेषकर महिला एवं बुजुर्गों द्वारा 2094 प्रकरण में पुलिस सहायता की मांग की गई है जिसपर पुलिस द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए सुरक्षा खतरा के अनुरूप कार्यवाही किया गया है। एप्प के माध्यम से गुम/चोरी के कुल 2,113 प्रकरण प्राप्त हुई है जिन्हें थाना के चक्कर लगाए बिना, आॅटो-जनरेटेड ई-मेल के माध्यम से पावती उपलब्ध कराई गई है।

इस मोबाईल एप्लीकेशन द्वारा आम नागरिक निम्नांकित सुविधाएं प्राप्त कर सकता है:-
“Report an Incident” feature के माध्यम से अपनी पहचान बिना बताए अपने क्षेत्र और समाज में हो रहे विभिन्न प्रकार के अपराध (जैसे - चोरी/हत्या/लूट/डकैती/शोषण/छेडखानी), यातायात संबंधी अपराध/घटनाओं की सूचनाएं तथा नगर निगम संबंधी समस्याओं को सीधे पुलिस को उपलब्ध कराया जा सकता है।
इस एप्लीकेशन में जनता की सुविधा हेतु Call Police और Call Administration  के अंतर्गत थाना प्रभारियों सहित पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों व प्रशासनिक अधिकारियों का नंबर भी उपलब्ध कराया गया है।
“My Safe Zone” feature के माध्यम से गुगल मैप पर सुरक्षा घेरा बनाया जाकर अपने बच्चों तथा नजदीकी रिश्तेदारों की सुरक्षार्थ निगरानी की जा सकती है तथा उनके द्वारा चिन्हांकित घेरा से बाहर जाते ही आपको संदेश प्राप्त होगा।
आकस्मिक परिस्थिति में संकट के समय SoS (Help Me) के माध्यम से एक क्लिक पर अपने 04 नजदीकी रिश्तेदारो व पुलिस को सूचना दी जा सकती है। सूचना प्राप्त होते ही पुलिस द्वारा आवश्यक सहयोग/सुरक्षा प्रदान की जाती है।
 “Report Lost Article” feature के माध्यम से किसी भी प्रकार के दस्तावेज और सामग्री खो जाने अथवा चोरी होने की स्थिति में पुलिस थाना जाए बिना ही अपनी सूचना दर्ज कराते हुए ई-मेल के माध्यम से पावती प्राप्त की जा सकती है।
“Vehicle Search” feature के माध्यम से किसी भी वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर से उसके मालिक व वाहन संबंधी पूर्ण जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
इस एप्लीकेशन में जिलों के विभिन्न Emergency Number दिए गए है, नागरिकगण जिसका उपयोग कर सकते है। 
“News Updates” feature के माध्यम से पुलिस द्वारा समय-समय पर जारी सूचनाओं को सीधे अपने मोबाईल पर प्राप्त किया जा सकता है।
“Nearby Places” feature के माध्यम से अपने नजदीकी स्थल जैसे पुलिस थाना, बस स्टैण्ड, बैक, एटीएम, अस्पताल, डाॅक्टर, मुवी-थियेटर, रेस्तरां और पेट्रोल पम्प की जानकारी लोकेशन व दूरी सहित प्राप्त की जा सकती है।
“My Close Group” feature के माध्यम से अपने नजदीकी रिश्तेदारों, परिजन व अन्य लोगों का समूह बनाकर गुगल मैप में उनका लोकेशन प्राप्त किया जा सकती है।
Towing Vehicle Search के माध्यम से नो-पार्किंग में खडे किये वाहनों, लावारिस वाहनों और एक्सिडेंटल वाहनों को पुलिस द्वारा क्रेन से उठाने की स्थिति में वाहन के स्वबंजपवद की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
 “Track My Location” feature के माध्यम से आप अपने परिवार के सदस्यों, बच्चों की लाइव लोकेशन व स्पीड समरी जान सकेंगे।
“Fare Calculation” feature के माध्यम से आम नागरिक दो स्थानों के बीच की दूरी व आॅटो रिक्शा के किराया की गणना स्वयं कर सकता है।
“Your Reports” feature के माध्यम से सिटीजन काॅप के उपयोगकर्ता द्वारा पुलिस को दिये सूचना/शिकायत पर की गई पुलिस कार्यवाही की जानकारी हासिल कर सकता है साथ ही अपना फीडबैक भेज सकता है।
“Reports Lookup” feature के माध्यम से किसी भी उपयोगकर्ता द्वारा किये गये शिकायत पर पुलिस कार्यवाही की जानकारी हासिल कर सकता है।
New Feature’s for Upgrade Version  
“Search Officials” feature के माध्यम से अपने क्षेत्र में कार्यरत् पुलिस अधिकारियों की पुष्टि की जा सकती है।
“Traffic IQ” feature के माध्यम से यातायात नियमों से संबंधित जानकारी हासिल की जा सकती है, यह फीचर नये ड्रायविंग लाइसेंस बनवाने के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराता है।
“Pathik” feature के माध्यम से आम नागरिक अपने सुरक्षित यात्रा की सुनिश्चितता पूर्व निर्धारित कर सकता है तथा आॅटो/टैक्सी के मालिक/चालक सहित वाहन के संबंध में जानकारी हासिल कर सकता है।
“Verification/Inform Police” feature के माध्यम से घरेलु नौकर/नौकर, किरायेदार, सिनियर सिटीजन व शहर से बाहर जाने की जानकारी पुलिस थाना जाए बिना ही दिया जा सकता है, साथ ही चरित्र सत्यापन प्राप्त करने में समय की बचत होगी।
“Atithi” feature यह फीचर लाॅज एवं होटल संचालकों एवं आॅपरेटर्स की सुविधा के लिए तैयार किया गया है। इस फीचर के उपयोग के लिए संचालक एवं आॅपरेटर को जोडा जाएगा, उसके बाद वे अपने मोबाईल के माध्यम से अतिथियों की जानकारी इस एप्प में अपडेट कर सकेंगे।
 “Speed Alert” feature इस फीचर के माध्यम से माता-पिता घर बैठे नजर रख सकेंगे, कहीं बच्चा तेज वाहन तो नही चला रहा है।

मंगलवार, 13 मार्च 2018

11:34 am

श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने नागर विमानन मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाला

श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने नागर विमानन मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाला



(वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु नागर विमानन मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार ग्रहण करते हुए। साथ में हैं नागर विमानन राज्यमंत्री श्री जयंत सिन्हा)



वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने आज नागर विमानन मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार ग्रहण करते हुए कहा कि विमानन क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मुक्त आकाश नीति से विमानन क्षेत्र में शानदार वृद्धि हो रही है और इस वृद्धि के लाभ रोजगार सृजन में बढ़ोतरी के रूप में देखा जाएगा।

विमान संपर्क बढ़ने और सस्ता किराया के कारण छोटे शहरों के लोग कामकाज और छुट्टियों के लिए विमान यात्रा करने लगे हैं। इसके परिणामस्वरूप भारतीय विमान सेवाओं को एक हजार से अधिक विमान बुक करने का आदेश देना पड़ा। ऐसा मुख्य रूप से कम लागत वाली विमान सेवाओं के नेतृत्व में हुआ।

मुक्त आकाश अंतर्राष्ट्रीय नीतिगत अवधारणा है, जिसमें नियमों तथा अंतर्राष्ट्रीय विमानन उद्योग के नियमनों को उदार बनाना है, विशेषकर वाणिज्यिक विमानन क्षेत्र में, ताकि विमानन उद्योग के लिए मुक्त बाजार का वातावरण बन सके।

सोमवार, 12 मार्च 2018

1:04 pm

मंत्रिमंडल ने मध्‍यस्‍थताऔर सुलह (संशोधन) विधयेक, 2018 को स्‍वीकृति दी

मंत्रिमंडल ने मध्‍यस्‍थताऔर सुलह (संशोधन) विधयेक, 2018 को स्‍वीकृति दी


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मध्‍यस्‍थता और सुलह (संशोधन) विधयेक, 2018 को लोकसभा में पेश करने की स्‍वीकृति दे दी है। यह विवादों के समाधान के लिए संस्‍थागत मध्‍यस्‍थता को प्रोत्‍साहित करने के सरकार के प्रयास का हिस्‍सा है और यह भारत को मजबूत वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) व्‍यवस्‍था का केंद्र बनाता है।

लाभ: 1996 के अधिनियम में संशोधन से मानक तय करने, मध्‍यस्‍थता प्रक्रिया को पक्षकार सहज बनाने और मामले को समय से निष्‍पादित करने के लिए एक स्‍वतंत्र संस्‍था स्‍थापित करके संस्‍थागत मध्‍यस्‍थता में सुधार का लक्ष्‍य प्राप्‍त करने में सहायता मिलेगी।

प्रमुख विशेषताएं:
1 यह उच्‍चतम न्‍यायालय और उच्‍च न्‍यायालय द्वारा निर्दिष्‍ट मध्‍यस्‍थता संस्‍थानों के माध्‍यम से मध्‍यस्‍थों की तेजी से नियुक्ति में सहायक है, इस संबंध में न्‍यायालय से संपर्क की आवश्‍यकता के बिना। विधेयक में यह व्‍यवस्‍था है कि संबंधित पक्ष अंतरराष्‍ट्रीय वाणिज्यिक मध्‍यस्‍थताके लिए और संबंधित उच्‍च न्‍यायालयों के अन्‍य मामलों में उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा निर्दिष्‍ट मध्‍यस्‍थता संस्‍थानों से सीधा संपर्क कर सकते है्ं।

2 इस संशोधन में एक स्‍वतंत्र संस्‍था भारत की मध्‍यस्‍थता परिषद (एसीआई) बनाने का प्रावधान है। यह संस्‍था मध्‍यस्‍थता करने वालों संस्‍थानों को ग्रेड देगी और नियम तय करके मध्‍यस्‍थता करने वालों को मान्‍यता प्रदान करेगी और वैसे सभी कदम उठाएगी जो मध्‍यस्‍थता, सुलह तथा अन्‍य वैकिल्‍पक समाधान व्‍यवस्‍था को बढ़ावा देंगे और संस्‍था इस उद्देश्‍य के लिए मध्‍यस्‍थतातथा वैकल्पिक विवाद समाधान व्‍यवस्‍था से जुड़े सभी मामलों में पेशेवर मानकों को बनाने के लिए नीति और दिशा निर्देश तय करेगी। यह परिषद सभी मध्‍यस्‍थता वाले निर्णयों का इलेक्‍ट्रोनिक डिपोजिटरी रखेगी। 

3 एसीआई निकाय निगम होगी। एसीआई के अध्‍यक्ष वह व्‍यक्ति होगा जो उच्‍चतम न्‍यायालय का न्‍यायाधीश रहा हो या किसी उच्‍च न्‍यायालय का मुख्‍य न्‍यायाधीश और न्‍यायाधीश रहा हो। अन्‍य सदस्‍यों में सरकारी नामित लोगों के अतिरिक्‍त जाने-माने शिक्षाविद आदि शामिल किए जाएंगे।

4 विधेयक समय-सीमा से अंतरराष्‍ट्रीय मध्‍यस्‍थताको अलग करके तथा अन्‍य मध्‍यस्‍थताओं में निर्णय के लिए समय-सीमा विभिन्‍न पक्षों की दलीलें पूरी होने के 12 महीनों के अंदर करके सेक्‍शन 29ए के उप-सेक्‍शन (1) में संशोधन का प्रस्‍ताव है।

5 इसमें नया सेक्‍शन 42ए जोड़ने का प्रस्‍ताव है ताकि मध्‍यस्‍थता करने वाला व्‍यक्ति या मध्‍यस्‍थता संस्‍थान निर्णय के सिवाय मध्‍यस्‍थतासे जुड़ी कार्यवाहियों की गोपनीयता बनाए रखेंगें। नया सेक्‍शन 42बी मध्‍यस्‍थता करने वाले को मध्‍यस्‍थता सुनवाई के दौरान उसके किसी कदम या भूल को लेकर मुकदमा या कानूनी कार्यवाही से सुरक्षा प्रदान करता है।

6 एक नया सेक्‍शन 87 जोड़ने का प्रस्‍ताव है जो स्‍पष्‍ट करेगा कि जब तक विभिन्‍न पक्ष सहमत नहीं होते संशोधन अधिनियम 2015 में - (ए) 2015 के संशोधन अधिनियम प्रारंभ होने से पहले शुरू हुई मध्‍यस्‍थता की कार्यवाही के मामले में (बी) संशोधन अधिनियम 2015 के प्रारंभ होने के पहले या ऐसी अदालती कार्यवाही शुरू होने के बावजूद मध्‍यस्‍थता प्रक्रिया के संबंध में चालू होने वाली अदालती कार्यवाहियों में लागू नहीं होगा तथा यह सेक्‍शन संशोधन अधिनियम 2015 के प्रारंभ होने या बाद की मध्‍यस्‍थता कार्यवाहियों में लागू होगा और ऐसी मध्‍यस्‍थता कार्यवाहियों से उपजी अदालती कार्यवाहियों के मामले में लागू होगा।

पृष्‍ठभूमि: मध्‍यस्‍थता प्रक्रिया को सहज बनाने, लागत सक्षम बनाने और मामले के शीघ्र निष्‍पादन और मध्‍यस्‍थता करने वाले की तटस्‍थता सुनिश्चित करने के लिए मध्‍यस्‍थताऔर सुलह अधिनियम, 1996 में मध्‍यस्‍थताऔर सुलह (संशोधन)अधिनियम, 2015 द्वारा संशोधन किया गया। लेकिन तदर्थ मध्‍यस्‍थता के स्‍थान पर संस्‍थागत मध्‍यस्‍थता को प्रोत्‍साहित करने और मध्‍यस्‍थता तथा सुलह (संशोधन) अधिनियम, 2015 को लागू करने में आ रही कुछ व्‍यावहारिक कठिनाईयों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा भारत के उच्‍चतम न्‍यायालय के सेवानिवृत्‍त न्‍यायाधीश, न्‍यायमूर्ति बी.एच. श्रीकृष्‍ण की अध्‍यक्षता में एक उच्‍च स्‍तरीय समिति (एचएलसी) बनाई गई। एचएलसी को निम्‍नलिखित कार्य दिए गए:-

  • भारत में मध्‍यस्‍थ संस्‍थानों के कामकाज और उनके कार्य प्रदर्शन का अध्‍ययन करके वर्तमान मध्‍यस्‍थता व्‍यवस्‍था केप्रभाव की जांच करना।
  • भारत में संस्‍थागतमध्‍यस्‍थताव्‍यवस्‍था को प्रोत्‍साहित करने के लिए रौडमैप तैयार करना।
  • वाणिज्यिक विवाद समाधान के लिए कारगर और सक्षम मध्‍यस्‍थताप्रणाली विकसित करना और कानून में सुझाए गए सुधारों पर रिपोर्ट प्रस्‍तुत करना।


उच्‍चस्‍तरीय समिति ने 30 जुलाई, 2017 को अपनी रिपोर्ट पेश की। समिति नेमध्‍यस्‍थता और सुलह अधिनियम, 1996 में संशोधन की सिफारिश की है। प्रस्‍तावित संशोधन उच्‍चस्‍तरीय समिति की सिफारिशों के अनुसार है।

12:35 pm

प्रधानमंत्री कल वाराणसी में फ्रांस के राष्ट्रपति श्री एमैनुएल मैक्रों की अगवानी करेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी कल सुबह वाराणसी में फ्रांस के राष्ट्रपति श्री एमैनुएल मैक्रों की अगवानी करेंगे।

दोनों राजनेता मिर्जापुर के लिए प्रस्‍थान कर जाएंगे, जहां वे एक सौर ऊर्जा संयंत्र का उद्घाटन करेंगे और फि‍र इसके बाद वे वाराणसी लौट आएंगे। वाराणसी में  दोनों राजनेता दीनदयाल हस्तकला संकुल का दौरा करेंगे। वे कारीगरों के साथ बातचीत करेंगे और उनकी शिल्पकलाओं से प्रत्‍यक्ष तौर पर रू-ब-रू होंगे।

प्रधानमंत्री श्री मोदी और राष्ट्रपति श्री मैक्रों इसके बाद वाराणसी में प्रसिद्ध अस्सी घाट पर पहुंचेंगे जहां वे गंगा के घाटों के आसपास सैर करने के लिए एक नौका पर सवार होंगे और फि‍र आखिर में वे ऐतिहासिक दशाश्वमेध घाट पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री श्री मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति के सम्मान में दोपहर के भोज की मेजबानी करेंगे।

दोपहर में  प्रधानमंत्री वाराणसी स्थित मदुदीह रेलवे स्टेशन और पटना के बीच एक ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। प्रधानमंत्री विभिन्न विकास परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे और वाराणसी स्थित डीएलडब्ल्यू मैदान में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करेंगे।

रविवार, 11 मार्च 2018

12:25 am

छत्तीसगढ़ राज्य के कर्मचारियों को वैयक्तिक आयकर विवरणी भरना अनिवार्य है, दिनांक 31 मार्च 2018 तक नही भरने पर हो सकती है जेल

छत्तीसगढ़ राज्य के कर्मचारियों को वैयक्तिक आयकर विवरणी भरना अनिवार्य है, दिनांक 31 मार्च 2018 तक नही भरने पर हो सकती है जेल 

ज्ञातव्य हो कि राज्य शासन के वित्त निर्देश १०/2018, दिनांक 08/03/2018 (आदेश देखने के लिए, यहां क्लिक करें) के माध्यम से भारत सरकार के निर्देश का हवाला देते हुए कहा गया है कि आयकर विभाग ने शासन संज्ञान में लाया है कि छत्तीसगढ़ स्थित विभाग/संगठन में कार्यरत् विभिन्न वेतनभोगी कर्मचारियों द्वारा अपनी आयकर विवरणी दाखिल नही की जाती है। वेतनभोगी कर्मचारियों के बीच यह समान्य अवधारणा है कि उनके वेतन के स्त्रोत पर कर की कटौती हो जाने के पश्चात् वैयक्तिक आयकर विवरणी दाखिल करने की आवश्यकता नही है। उसी प्रकार यह भी धारणा है कि ऐसे वेतनभोगी कर्मचारी जिनका वार्षिक सकल वेतन 5 लाख तक है उन्हें, अपनी वैयक्तिक आयकर विवरणी दाखिल करने की आवश्यकता नही है। 

आयकर अधिनियम 1961 की धारा 139 (1) के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति जिसकी कुल आय पूर्व वर्ष के दौरान इस अधिनियम के अंतर्गत निर्धारणीय अधिकतम रकम से अधिक है तो उसे अपनी आयकर विवरणी नियम तारीख से पूर्व दाखिल करना होगा तथा यदि कोई व्यक्ति नियत तिथि तक अपनी आयकर विवरणी दाखिल करने में असफल रहा तो, आयकर अधिनियम 1961 की धारा 271 के तहत रूपये 5000 भारित आरोपित करने का प्रावधान है। वित्तीय वर्ष 2016-17 अर्थात् निर्धारण वर्ष 2017-18 के दौरान जिन व्यक्तियों की कुल योग्य आय रूपये २,५०,०००/- से अधिक है उन्हें 31 मार्च 2018 तक अपनी आयकर विवरणी भरना अनिवार्य है इसके पश्चात् पेनाल्टी तथा धारा 276 सीसी के तहत् अभियोजन जिसमें 3 माह से 7 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। 

वेतनभोगी कर्मचारी आयकर विभाग के वेबसाईट https://www.incometaxindiaefiling.gov.in/home तथा मोबाईल एप्प आयकर सेतू का उपयोग करके अपना आयकर विवरणी दाखिल कर सकते हैं।


# राज्य शासन के वित्त निर्देश १०/2018, दिनांक 08/03/2018 (आदेश देखने के लिए, यहां क्लिक करें)

शुक्रवार, 9 मार्च 2018

4:24 pm

क्या, वाकई धरती से जीवन समाप्त हो जाएगा, धरती में जीवन को संरक्षित करने के उपाय क्या है, जानने के लिए आगे पढ़ें

क्या, वाकई धरती से जीवन समाप्त हो जाएगा, धरती में जीवन को संरक्षित करने के उपाय क्या है, जानने के लिए आगे पढ़ें

हम सबको यह ज्ञात है कि जल पृथ्वी की सतह पर बहुतायत में मिलने वाला यौगिक है। जल या पानी एक आम रासायनिक पदार्थ है यह दो अणु हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से मिलकर बना है, जो सारे प्राणियों के जीवन का आधार है। जैविक दृष्टिकोण से, पानी में कई विशिष्ट गुण हैं जो जीवन के प्रसार के लिए महत्वपूर्ण हैं। साफ और ताजा पेयजल मानवीय और अन्य जीवन के लिए आवश्यक है, लेकिन दुनिया के कई भागों में खासकर विकासशील देशों में भयंकर जलसंकट है और एक अनुमान है कि 2030-35 तक विश्व की आधी जनसंख्या इस जलसंकट से जुझने लगेगी। 

वर्तमान परिदृश्य में विश्व में तेल के लिए युद्ध हो रहा है। भविष्य में ऐसा न हो कि जल के लिए भयावह युद्ध हो जाए। इसलिए मानव समुदाय को सचेत होना चाहिए। उन्हें ऐसी जीवन शैली अपनाने की आवश्यकता है, जिसमें जीवन अमृतरूपी जल का अपव्यय न होता हो।

पानी के किल्लत निपटने के लिए, यदि सम्पूर्ण विश्व के आम नागरिक और शासन एकजूट होकर जल एवं पंर्यावरण के संरक्षण के लिए कार्य नही करेंगे, केवल जल के दोहन में मग्न रहेंगें तो वह दिन दूर नही होगा कि पृथ्वी में मानव सहित अनेकोनेक जीवन को संकट का सामना करना पडे। 

मै यह जरूर कहना चाहूंगा कि यदि हम जल के दोहन में मग्न रहेंगे तो जल्द ही धरती जीवनहीन हो जाएगा। इसलिए मै आम नागरिकों, समाजिक संगठनों, विश्व समूदाय, शासन/प्रशासन से आग्रह करता हूं कि जल संकट से निपटने के लिए मेरे द्वारा दिए गए उपाय का अनुकरण करते हुए बेहतर विकल्प अपनाएं।

जल संकट से निपटने के उपाय:- भूगर्भ जलस्तर और भविष्य में पानी के संकट से बचने के लिए वर्षा जल संचयन अपरिहार्य है। जल संचयन के बिना धरती के जलस्रोतों को अक्ष्यण नहीं रखा जा सकता है। जल संचयन की विधियों पर नवीनतम शोध और इसकी वैज्ञानिक पद्धति को प्रयुक्त कर इसके सुखद परिणाम मिलेंगे। इसहेतु निम्नानुसार कारगर उपाय हो सकते हैं-
- शासन स्तर पर नदी जोडो परियोजना पर शीघ्रता से कार्य प्रारंभ किया जाना चाहिए।
- गर्मी फसल एवं पीने के पानी के लिए जल संचयन के लिए बांध का निर्माण कराया जाना चाहिए।  
- अधिक से अधिक वृक्षारोपण किया जाए, बेहतर होगा कि नियमित आक्सीजन देने वाले वृक्ष लागाएं।
- नदी के किनारे कम-से-कम 1किलो मीटर के दायरे में अनिवार्य रूप से वृक्षारोपण अथवा वन क्षेत्र हो। सडक के किनारे दोनो ओर कम-से-कम 50-100 मीटर की चैडाई में फलदार वृक्षों, आयुर्वेदिक औषधी एवं कन्दमूल लगाया जाना चाहिए, इसके रखरखाव, आजीविका एवं राजस्व प्राप्ति के लिए एक योजना बनाकर टेण्डर में दिया जाना चाहिए।
- रेन वाटर  हार्वेस्टिंग सिस्टम को बढावा दिया जाए।
- मल्टीफ्लोर बिल्डिंग में उपयोग किए गए पानी को अच्छे से छानकर वृक्षों को पलाया जा सकता है।
- आहार में कम से कम 60 फिसदी हिस्सा वृक्षों के फलों और पत्तों के जूस को शामिल किया जावे।
- औषधी में एलोपैथी के बजाए आयुर्वेदिक के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
- गहरा कुआं का निर्माण कर जल संचयन किया जाना चाहिए।
- माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रायोजित स्वच्छता अभियान के तर्ज में वृक्षारोपण अभियान संचालित हो।
- भूजल दोहन अनियंत्रित तरीके से न हो, इसके लिए आवश्यक कानून बनना चाहिए।
- प्रत्येक व्यक्ति के नाम पर कमसेकम 10वृक्ष लगाना चाहिए, जिसमें एक पीपल/बरगद का वृक्ष भी हो।
- जल विद्युत पर तत्काल रोक लगाते हुए सोलर उर्जा के लिए नैनो टेक्नाॅलाजी की खोज पर बल दिया जाना चाहिए।
- सडक को धुल रहित होना चाहिए, ताकि कपडे गंदे न हो।
- एसी वाहनों पर रोक लगाने की आवश्यकता है। परन्तु यह तभी संभव होगा, पर्याप्त मात्रा में पथरोपण हुआ हो।


HP Joshi
Naya Raipur, Chhattisgarh

11:55 am

सीमाओं से मुक्त पुलिसिंग की कार्यवाही सुनिश्चित करे - GP Singh

सीमाओं से मुक्त पुलिसिंग की कार्यवाही सुनिश्चित करे - GP Singh


श्री जीपी सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग रेंज, दुर्ग द्वारा दिनांक 8/03/2018 को अपराधिक गतिविधियों एवं प्रकरणों के संबंध में पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव, बालोद, बेमेतरा एवं कबीरधाम के पुलिस अधीक्षकों की आईजी कार्यालय में क्राईम मीटिंग ली गई जिसमें क्राईम के आंकडों की समीक्षा कर निम्नानुसार निर्देश दिये गये:-

क्राईम के आंकड़ेः- बैठक में समीक्षा के दौरान प्राप्त आंकड़ों अनुसार जिला राजनांदगांव में 845, जिला कबीरधाम में 241, जिला बेमेतरा में 116 एवं बालोद में 289 अपराध लंबित है। जिला राजनांदगांव में 426, जिला कबीरधाम में 165, जिला बेमेतरा में 58 एवं बालोद में 230 मर्ग लंबित पाए गए है। गुम इंसान के अंतर्गत जिला राजनांदगांव में 519 प्रकरण, कबीरधाम में 152, बेमेतरा में 283 एवं बालोद में 211 प्रकरण लंबित हैं। समंस/वारंट का अवलोकन किया गया, समंस/वारंट के अंतर्गत जिला राजनांदगांव में 97 प्रकरण, कबीरधाम में 2, बेमेतरा में 62 एवं बालोद में 27 प्रकरण लंबित हैं। जमानती वारंट के अंतर्गत जिला राजनांदगांव में 79 प्रकरण, कबीरधाम में 1, बेमेतरा में 26 एवं बालोद में 2 प्रकरण लंबित हैं। गिरफ्तारी वारंट के अंतर्गत जिला राजनांदगांव में 152 प्रकरण, कबीरधाम में 5, बेमेतरा में 28 एवं बालोद में 5 प्रकरण लंबित हैं। स्थाई वारंट के अंतर्गत जिला राजनांदगांव में 3708 प्रकरण, कबीरधाम में 528, बेमेतरा में 161 एवं बालोद में 605 प्रकरण लंबित हैं।

गुम इंसानों की दस्तयाबी की कार्यवाही:- गुमशुदा इंसानों के प्रकरणों में लगातार हो रही वृद्वि को ध्यान में रखते हुए अधिक गंभीरता से जांच करने की आवश्यकता है। गुमशुदा इंसानों के परिजनों/रिश्तेदारों/मित्रों से गंभीरतापूर्वक पूछताछ किया जावे तथा क्लोज सर्किट, टी.व्ही.कैमरा के मदद से पहचान/परीक्षण किया जावे। 


समंस/वारंटों की तामीली:- लंबित प्रकरण के तामिली का प्रतिशत पर चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस अधीक्षकों को 40 प्रतिशत का न्यूनतम लक्ष्य देते हुए स्थाई वारंट की तामील करने निर्देशित किया गया। जमानती, गिरफ्तारी, स्थाई, समंस/वारंट के लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण हेतु एक निश्चित समयावधि के भीतर तामिली कराना सुनिश्चित करने एवं माननीय न्यायालयों के निर्देशों के पालन में व समंस वारंटों की तामीली में किसी भी तरह की लापरवाही पाये जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया। 

173(8) जा.फौ. की कार्यवाहियों में तेजी:- 173(8) जा.फौ. के जिला राजनांदगांव में 72, कबीरधाम में 7, बेमेतरा में 19 एवं बालोद में 12 प्रकरण लंबित हैं। 173(8) जा.फौ. के लंबित प्रकरणों के निराकरण हेतु पुलिस अधिकारियों एवं पर्यवेक्षण अधिकारियों को एक विशेष अभियान चलाकर गिरफ्तारी करने के संबंध में विधि संगत कार्यवाही करने के निर्देश दिये गये।

सीमाओं से मुक्त पुलिसिंग:- असामाजिक तत्वों एवं अपराधियों की गतिविधियां सीमाओं से बाधित नहीं रहती है। अतः थाना प्रभारी को निर्देशित किया जाए कि शिकायत लेकर आने वाले पीड़ित को थाना क्षेत्र के बंधन से ऊपर उठकर यथोचित राहत दें तथा सीमाओं से मुक्त पुलिसिंग की कार्यवाही सुनिश्चित करें।

असामाजिक तत्वों एवं अवैधानिक व्यापार करने वालों पर कार्यवाही:- असमाजिक तत्वों को बढ़ावा देने वाले अवैधानिक व्यापार जैसे जुंआ, सट्टा, कबाड़ी, फरनेस आॅयल, पीडीएस केरोसिन, गांजा, गौ-तस्करी, अवैध शराब की तस्करी, हुक्काबार, एवं ड्रग माफिया पर रोक लगाकर, अपराध के जड़ पर कार्यवाही किया जावे, इस संबंध में पूर्व में भी इस कार्यालय से दिशा-निर्देश प्रसारित किया गया है। 

आम नागरिकों के फीडबैक से ज्ञात होता है कि असमाजिक तत्वों के द्वारा किये जाने वाले च्नइसपब छनपेंदबम जैसे रंगदारी, डराने-धमकाने, मारपीट करने, चाकूबाजी, शराब का सेवन कर हुल्लड़बाजी करने एवं छेड़छाड़ के सामान्य अपराधों से ज्यादा परेशान रहती है। इसलिए छोटे-से-छोटे किस्म के अपराधों पर त्वरित कार्यवाही करने की आवश्यकता है। इस तरह की कार्यवाही से बड़े अपराधों पर भी नियंत्रण किया जा सकता है।

ऐसे प्रत्येक व्यवसाय जो गुंडागर्दी की आड़ में पनपते हैं जैसे जमीन खाली कराना, घर खाली कराना, ब्याज की वसूली, इंश्योरेंस, Seizure Business उस पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया जाये। अपराधियों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों को भी तत्काल संज्ञान में लिया जाकर समुचित कार्यवाही सुनिश्चित की जाये। क्रास-केस की आड़ में भी गुंडागर्दी के ऐसे कुछ दृष्टांत सामने आये हैं, जिसमें क्रास-केस की आड़ में गुंडे व असामाजिक तत्वों को मदद मिलती है, ऐसे मामलों में पर्यवेक्षणीय अधिकारियों द्वारा विशेष रूचि लेकर थाना प्रभारियों से नियमानुसार कार्यवाही कराया जाए।

शरीर संबंधी अपराध पर कार्यवाही:- शरीर संबंधी अपराध व गुंडागर्दी के प्रकरणों में पुलिस Zero Tolerance की नीति अपनानी चाहिये। थाने में पुलिसकर्मी का Body Language गुंडों के प्रति सख्त व पीड़ित व्यक्ति के प्रति मददगार होना चाहिये। ऐसी कार्यवाही से आमजन का पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ेगा साथ ही अपराध संबंधी सूचनायें भी प्राप्त होगी।

संपत्ति संबंधी अपराधों पर कार्यवाही:- संपत्ति संबधी अपराधों में बरामदगी पर थाना प्रभारियों को विशेष ध्यान देने की आवश्यता है। इसहेतु पुलिस अधीक्षक/एसडीओपी एवं अन्य पर्यवेक्षणीय अधिकारी स्वयं रूचि लेकर लंबित संपत्ति संबधी अपराधों में बरामदगी के स्तर में वृद्वि करने हेतु ठोस पहल करें। 
इस आंकलन के आधार पर गश्त, नाकाबंदी व अपराधियों की तलाश, रेड इत्यादि की योजना बनाई जावे एवं समय-समय पर स्वयं समीक्षा कर आवश्यकतानुसार अपने स्तर पर समयबद्ध अभियान चलाकर अपराधियों के विरूद्ध विधिसंगत कार्यवाही सुनिश्चित किया जावे। संपत्ति संबंधी अपराधों में माल मुजलिमों का पता करने का कारगर प्रयास सुनिश्चित करें जिससे कि बरामदगी के प्रतिशत में वृद्धि हो।

चिट-फण्ड/धोखाधडी के खिलाफ कार्यवाही:- 420 भादवि के प्रकरणों में विशेषकर चिट-फण्ड जैसे प्रकरणों पर विशेष सक्रियता की आवश्यकता है। ऐसे प्रकरणों की समीक्षा के दौरान प्रकाश में आया है कि विवेचक मूल दस्तावेज प्राप्ति हेतु मौखिक रूप से कार्यवाही करते हैं जो उचित नहीं है इस संबंध में सीआरपीसी के प्रावधानों के तहत् कार्यवाही करना सुनिश्चित करें। यदि किसी विभाग से प्रकरण से संबंधित मूल दस्तावेज प्राप्त करना आवश्यक हो, तो संबंधित विभाग के सक्षम अधिकारी को विधिसंगत पत्र लिखा जावे। वहीं चिट-फण्ड के प्रकरणों में छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम - 2005 एवं नियम - 2015 के अनुसार चिट-फण्ड/धोखाधडी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने के संबंध में निर्देशित किया गया है।

साईबर क्राईम एवं प्रशिक्षण:- वर्तमान परिदृश्य में प्रायः प्रत्येक अपराध से संबंधित साईबर संबंधी साक्ष्य उपलब्ध होते हैं जो प्रकरण की विवेचना के लिये आवश्यक है। पुलिस अधीक्षकगण जिले में समय-समय पर सायबर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित करना सुनिश्चित करें, ताकि सायबर संबंधी अपराधों का निराकरण में तेजी आ सके। 

Whatsapp ग्रुप में नजर:- जिलों में संचालित विभिन्न वाट्सएप्प ग्रुप के माध्यम से सामाजिक, धार्मिक, राजनैतिक रूप से आक्रोश फैलाने वाले संदेश प्रसारित किए जाते हैं, जिससे अनेको बार कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित होती है। अतः ऐसे वाट्सएप्प ग्रुप पर नजर रखी जाए तथा इनके ग्रुप एडमिनों की सूची तैयार कर ली जावे।

विवेचना के स्तर में सुधारः- केस डायरी में विवेचना के दौरान मूल दस्तावेजों, सीडीआर डिटेल्स व अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों आदि के संकलन में विवेचकों द्वारा लापरवाही बरतने पर अभियुक्तो को इसका लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिये थाना प्रभारियों द्वारा समय-समय पर विवचकों के कार्यों की समीक्षा करने एवं नगर पुलिस अधीक्षक/एसडीओपी द्वारा इसका नियमित रूप से पर्यवेक्षण किया जाने हेतु निर्देशित किया गया। 

अन्य अपराध विवेचना संबंधी निर्देश:- प्रो-एक्टिव कार्यवाही के तहत क्षेत्र में हो रही अवैध प्लाटिंग आदि पर नज़र रखा जाए एवं अवैध प्लाटिंग की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्यवाही किया जाए।

बैठक के दौरान श्री जीपी सिंह ने कहा कि बेसिक पुलिसिंग को सुदृढ़ करने मंे थानों की अहम भूमिका होती है, जिसके लिये थाना स्तर पर क्रिमिनल इंटेलीजेंस होना आवश्यक है। कई बार ऐसे अपराधी भी पकड़ में आते हैं, जिनके खिलाफ हमारे पास कोई रिकार्ड नही रहता जबकि वह पूर्व में भी अपराध को अंजाम दे चूका होता है। इस लिए अपराधियों से पूछताछ के प्रभावी तरीके अपनाने की आवश्यकता है ताकि उनके अन्य अपराध में संलिप्तता की जानकारी मिल सके। 

11:43 am

चौक -चैराहों में होने वाले वाहन चेकिंग बंद कर नये प्वाईंट चिन्हांकित करें - आईजी जीपी सिंह

चौक -चैराहों में होने वाले वाहन चेकिंग बंद कर नये प्वाईंट चिन्हांकित करें - आईजी जीपी सिंह

श्री जीपी सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग रेंज, दुर्ग नें रेज के 5 जिलों के यातायात व्यवस्था को अव्वल दर्जे के करने के उद्देश्य से जिला दुर्ग, राजनांदगांव, बालोद, बेमेतरा एवं कबीरधाम के पुलिस अधीक्षकों को निम्नानुसार निर्देश प्रसारित किए -

वाहन चेकिंग चैक-चैराहो में बंद:- प्रायः देखा जा रहा है कि चैंक-चैराहों एवं विशेषकर ट्रैफिक सिग्नलों पर वाहनों की चेकिंग की कार्यवाही की जा रही है, चूंकि ट्रैफिक सिग्नलों पर लोगों का रेड़ और ग्रीन सिग्नल पर ध्यान ज्यादा रहता है। चेकिंग की कार्यवाही ऐसे स्थलों पर करने से यातायात व्यवस्था बिगडती है व जनता को असुविधा का सामना करना पडता है। इसलिए मुख्य चैक-चैराहों एवं ट्रैफिक सिग्नल पर चेकिंग की कार्यवाही बंद करने और चेकिंग के नए प्वाइंट निर्धारित किए जाने हेतु निर्देशित किया गया है।

यातायात पुलिस की कार्यवाही:- शराब पीकर वाहन चलाने वाले चालकों, तीन सवारी, ओवर स्पीड, हाई-वे में बिना हेलमेट वाहन चलाने वाले, बिना नंबर प्लेट/फेन्सी नंबर प्लेट और नाबालिक वाहन चालकों पर यातायात पुलिस द्वारा कठोर कार्यवाही सुनिश्चित की जावे।

ई-चालान की कार्यवाही:- वर्तमान में चलान की कार्यवाही परम्परागत तरीके से रसीद काट कर की जा रही है, जिसमें अनावश्यक विलंब होता है। जिसे देखते हुए ई-चालान की कार्यवाही शीघ्र जिलों में लागू की जाएगी। इसके लिए संबंधित एजेंसी से समन्वय स्थापित कर सॉफ्टवेयर तैयार कराया जाएगा।

आॅटो/रिक्शा चालकों का रिकार्ड:- हाल में घटित अपराधिक घटनाओं में ऑटो/टैक्सी चालकों की संलिप्तता पाई गई है। अतः जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे सभी प्रकार के सवारी वाहनों एवं वाहन चालकों का सम्पूर्ण रिकार्ड, नाम, पता, मोबाईल नंबर, स्थायी एवं वर्तमान निवास के साथ ही अपराधिक रिकार्ड का सम्पूर्ण व्यौरा तैयार किया जा रहा है। इस रिकार्ड को जिले में संचालित  सिटीजन काॅप मोबाईल एप्लीकेशन में अपलोड किया जाएगा। यह जानकारी आॅटो/टैक्सी का उपयोग करने वाले छात्र-छात्राओं एवं महिलाओं की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होगी। 

ट्रैफिक जागरूकता पर सेमिनार:-यातायात नियमों की जानकारी देने व वाहन दुर्घटना में हो रही बढ़ोत्तरी को ध्यान में रखकर आम जनता सहित युवावर्ग को संतुलित गति से वाहन चलाने के संबंध में स्कूल/काॅलेज व अन्य शैक्षणिक संस्थानों में यातायात विशेषज्ञों द्वारा संमिनार आयोजित किया जाकर लोगों को यातायात संबंधी जागरूकता अभियान से जोडने का सार्थक प्रयास किया जावे।



सीसीटीव्ही का उपयोग:- शहर के विभिन्न चैक चैराहों में स्थापित सीसीटीव्ही कैमरे के बेहतर संचालन सुनिश्चित किया जाए। यातायात नियम तोडने वाले वाहन चालकों की जानकारी सीसीटीव्ही के माध्यम से ली जावे और संबंधित वाहन चालकों के विरूद्ध चालानी कार्यवाही की जाए।

श्री जीपी सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग ने यातायात चेकिंग के दौरान चैक-चैराहों पर आमजन को हो रही असुविधा को ध्यान में रखते हुए चैक-चैराहों में होने वाले चेकिंग बंद कर यातायात चेकिंग हेतु नये प्वाईंट चिन्हांकित करते हुए चेकिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।

गुरुवार, 8 मार्च 2018

12:35 pm

आईजी दुर्ग ने रेल्वे सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में अधिकारियों की बैठक ली

आईजी दुर्ग ने रेल्वे सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में अधिकारियों की बैठक ली


श्री जीपी सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग रेंज दुर्ग द्वारा रेलवे स्टेशनों में आपातकालीन स्थिति, कानून-व्यवस्था, नक्सली घटना एवं रेलवे की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुये पुलिस मुख्यालय, रायपुर के निर्देशानुसार दिनांक 07.03.2018 को आरपीएफ, जीआरपी एवं जिला दुर्ग, राजनांदगांव एवं बालोद जिले के पुलिस अधिकारियों की रेंज स्तरीय बैठक ली गई। बैठक में चर्चा उपरांत निम्नानुसार कार्यवाही के निर्देश दिए:-

स्टेशन परिसर में सीसीटीवी कैमरा की स्थापना:-
राजनांदगांव जिले अंतर्गत पनियाजोब रेल्वे स्टेशन एवं बोरतलाव रेल्वे स्टेशन संवेदनशील होने के कारण अपराधियों व असमाजिक तत्वों द्वारा आने-जाने के लिए इन स्टेशनों का उपयोग किया जा सकता है, ऐसे लोगों की पहचान व सुरक्षा हेतु रेल्वे प्रबंधन के माध्यम से सीसीटीवी कैमरा की स्थापना कराया जावे तथा सीसीटीवी कैमरा की सुरक्षा हेतु पर्याप्त प्रबंध भी किया जावे। 
रायपुर रेल्वे स्टेशन में रेल्वे द्वारा सुनियोजित तरीके से कैमरो की स्थापना की गई है, जिसमें आटो से उतरने से लेकर ट्रेन परिसर में घूमने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर कैमरे की नज़र रहती है। इसी तर्ज पर दुर्ग एवं राजनांदगांव जिले के रेल्वे स्टेशनों में अपराधिक तत्वों की पहचान व सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरो की स्थापना कराया जावे।
बालोद व दल्ली-राजहरा रेल्वे स्टेशनों एवं संवेदनशील क्षेत्रों में  सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने के संबंध मे रेल्वे को प्रस्ताव भेजा जाए ।

रेलवे लाईन की सुरक्षा:- बालोद जिले के गुदुम क्षेत्र में करीब 17 किमी रेल्वे मार्ग पर ट्रायल की कार्यवाही जारी है, जिस पर शीघ्र ही उद्घाटन प्रस्तावित है। इस क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था बढाई जाएगी। 

आपातकालीन स्थिति से निपटने माॅकड्रील:- रेल्वे स्टेशन एवं क्षेत्रान्तर्गत रेल काॅरिडोर में किसी बडी अप्रिय घटना से निपटने के लिये जीआरपी, जिला बल, आरपीएफ व रेल्वे की रिस्पांस टाईम आदि पर ध्यान रखने हेतु समय-समय पर माॅकड्रील कराया जावे।

अन्य:-
राजनांदगांव अंतर्गत मुढ़ीपार रेल्वे स्टेशन मास्टर को लोकल गाड़ी एवं पैसेंजर गाड़ी विलंब होने की स्थिति में सवारियों द्वारा गाली-गलौच, धमकी व शासकीय कार्य में व्यवधान उत्पन्न करने की जानकारी संज्ञान में आई है। जिस हेतु स्टेशन परिसर में आरपीएफ व जीआरपी का बल तैनात किया जावे तथा ऐसे उपद्रवी तत्वों के खिलाफ पुलिस कार्यवाही की जाएगी। 
आरपीएफ द्वारा रेल्वे संपत्ति की चोरी से संबंधित प्रकरणों, चोरी के आरोपियों की सूची व हिस्ट्रीशीटर आदि की जीआरपी के साथ-साथ जिला पुलिस बल से भी साझा किया जाए, ताकि ऐसे तत्वों के खिलाफ कठोर कार्यवाही किया जा सके।

बुधवार, 7 मार्च 2018

10:33 am

आईजी दुर्ग ने ली दुर्ग पुलिस की क्राईम मीटिंग

आईजी दुर्ग ने ली दुर्ग पुलिस की क्राईम मीटिंग


श्री जीपी सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग रेंज, दुर्ग द्वारा दिनांक 6/03/2018 को अपराधिक गतिविधियों एवं प्रकरणों के संबंध में पुलिस अधीक्षक दुर्ग सहित जिले के अन्य राजपत्रित पुलिस अधिकारियों की आईजी कार्यालय में क्राईम मीटिंग ली गई जिसमें क्राईम के आंकडों की समीक्षा कर  निम्नानुसार निर्देश दिये गयेः-

क्राईम के आंकड़ेः- बैठक में समीक्षा के दौरान प्राप्त आंकड़ों अनुसार जिला दुर्ग की दिनांक 31.12.2017 की स्थिति में गुम इंसान के कुल 1669 प्रकरण, मर्ग के 1794 प्रकरण, 173(8) जा.फौ. के 62 प्रकरण, लंबित चालान 65, 41(1/4) के 103 प्रकरण, लंबित अपराध 596 प्रकरण एवं पेंडिंग माल 3584 प्रकरण लंबित है। समंस/वारंट की समीक्षा में पाया गया कि स्थाई वारंट 3819, गिरफ्तारी वारंट 374, जमानती वारंट 235 एवं समंस 257 लंबित है, जिसमें वारंटों की तामीली क्रमशः 7, 40, 68 एवं 79 प्रतिशत पाया गया है। इसी तरह जिले में दिनांक 28.02.18 की स्थिति में जनता वि. जनता के कुल 269, पुलिस वि. पुलिस के 4 एवं जनता वि. पुलिस के 80 प्रकरण में में जांच की कार्यवाही लंबित पाये गये।

गुम इंसानों की दस्तयाबी की कार्यवाहीः- गुम इंसान प्रकरणों में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा याचिका क्रमांक WPC/75/2012 दिनांक 10.05.2013 के तहत् बचपन बचाओ आंदोलन वि. शासन एवं अन्य के प्रकरण में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुरूप आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें।

समंस/वारंटों की तामीलीः- जमानती, गिरफ्तारी, स्थाई, समंस/वारंट के लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण हेतु एक निश्चित समयावधि के भीतर तामिली कराना सुनिश्चित करने एवं माननीय न्यायालयों के निर्देशों के पालन में व समंस वारंटों की तामीली में किसी भी तरह की लापरवाही पाये जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया।

173(8) जा.फौ. की कार्यवाहियों में तेजीः- 173(8) जा.फौ. के लंबित प्रकरणों के निराकरण हेतु पुलिस अधिकारियों एवं पर्यवेक्षण अधिकारियों को एक विशेष अभियान चलाकर गिरफ्तारी करने के संबंध में विधि संगत कार्यवाही करने के निर्देश दिये गये।

चिट-फण्ड/धोखाधडी के खिलाफ कार्यवाही:- 420 भादवि के प्रकरणों में विशेषकर चिट-फण्ड जैसे प्रकरणों पर विशेष सक्रियता की आवश्यकता है। उक्त संबंध में छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम - 2005 एवं नियम - 2015 के अनुसार चिट-फण्ड/धोखाधडी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने के संबंध में निर्देशित किया गया है।

शरीर संबंधी अपराध पर कार्यवाही:- शरीर संबंधी अपराध के अंतर्गत थाना प्रभारी मामले की गंभीरता को संज्ञान में लेते हुए अपराधी के विरूद्ध तत्काल एवं कठोर कार्यवाही करे, ताकि असमाजिक/गुण्डा तत्व भयभीत रहें तथा इस प्रकार के अपराध पर नियंत्रण हो सके।

संपत्ति संबंधी अपराधों पर कार्यवाहीः- जिले में अपराधिक गिरोह द्वारा संपत्ति संबंधी अपराध किए जाते हैं, उनका अपराधिक मानचित्र गत 10 वर्षों का तैयार करें। उस मानचित्र में अपराध की प्रकृति, घटित होने का समय व दिनांक अंकित कर विभिन्न अपराधिक घटनाओं के ट्रेंड एवं पैटर्न का आंकलन करें। इस आंकलन के आधार पर गश्त, नाकाबंदी व अपराधियों की तलाश, रेड इत्यादि की योजना बनाई जावे एवं समय-समय पर स्वयं समीक्षा कर आवश्यकतानुसार अपने स्तर पर समयबद्ध अभियान चलाकर अपराधियों के विरूद्ध विधिसंगत कार्यवाही सुनिश्चित किया जावे। संपत्ति संबंधी अपराधों में माल मुजलिमों का पता करने का कारगर प्रयास सुनिश्चित करें जिससे कि बरामदगी के प्रतिशत में वृद्धि हो।

विवेचना के स्तर में सुधारः- केस डायरी में विवेचना के दौरान मूल दस्तावेजों, सीडीआर डिटेल्स व अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों आदि के संकलन में विवेचकों द्वारा लापरवाही बरतने पर अभियुक्तो को इसका लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिये थाना प्रभारियों द्वारा समय-समय पर विवचकों के कार्यों की समीक्षा करने एवं नगर पुलिस अधीक्षक/एसडीओपी द्वारा इसका नियमित रूप से पर्यवेक्षण किया जाने हेतु निर्देशित किया गया।

अपराधी/असमाजिक तत्व पर कार्यवाही - नये निगरानी में रखने योग्य गुण्डा बदमाश/असमाजिक तत्वों को चिन्हांकित करने व निगरानी शुदा बदमाशों/असमाजिक तत्वों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। बैठक में, पुलिस की विजीबिलीटी को बढाने और अपराधियों पर नकेल कसने के तरीके बताए।

बैठक के दौरान श्री जीपी सिंह ने कहा कि पुलिस का मुख्य कार्य अपराधों पर नियंत्रण कर पीडित को तत्काल सहायता पहुंचाना है। प्रकरण के लंबित होने से पीडित को अनेको बार थाना एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय में चक्कर लगाना पडता है, प्रकरण के निराकरण नही होने के कारण समाज में पुलिस की नकारात्मक छवि बनती है। जिस हेतु प्रकरणों पर सक्रियता से काम करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। श्री सिंह ने आम-जनता द्वारा थाना/एसडीओपी स्तर पर प्राप्त होने वाली शिकायतों पर पीड़ित पक्ष से सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार कर उचित कार्यवाही करने हेतु पर्यवेक्षण अधिकारियों को निर्देशित किया गया एवं राजपत्रित अधिकारियो को थाना स्तर पर लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर प्रकरण निराकृत करने के निर्देश दिए गए हैं।

गुरुवार, 1 मार्च 2018

5:47 pm

श्री जीपी सिंह, आईजी, दुर्ग ने नक्सल प्रभावित मानपुर में सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली

श्री जीपी सिंह, आईजी, दुर्ग ने नक्सल प्रभावित मानपुर में सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली 

श्री जीपी सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग रेंज दिनांक 1 मार्च 2018 को नक्सल प्रभावित संवेदनशील क्षेत्र मानपुर (राजनांदगांव) दौरे पर रहे। जहां उन्होंने क्षेत्र के नक्सल अभियानों के संबंध में बैठक ली तथा भविष्य में होने वाले नक्सल ऑपरेशन की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव, केन्द्रीय बल के अधिकारी एवं जिले के अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

नक्सल रणनीति - अंतर्राज्यीय सीमाओं में स्थित थानों एवं केन्द्रीय बल से समन्वय स्थापित कर नक्सलियों के खिलाफ गतिविधि तेज होगी। जिन क्षेत्रों में पुलिस की कम सक्रियता है ऐसे क्षेत्रों में सूचनातंत्र को मजबूत करते हुए फोर्स के मूव्हमेंट को बढाया जाएगा। पुलिस अधिकारियों को तेंदूपत्ता सीजन में नक्सलियों की फण्डिंग को रोकने तथा तेंदूपत्ता ठेकेदारों से नक्सलियों द्वारा की जाने वाली अवैध वसूली को रोकने के संबंध में जानकारी दी गई।

सामूदायिक पुलिसिंग पर जोर - सूचना तंत्र को व्यापक/प्रभावी बनाने के लिए सामूदायिक पुलिसिंग के अंतर्गत अंदरूनी क्षेत्रों में सिविक एक्शन की कार्यवाही जैसे खेल गतिविधियां, मेडिकल कैम्प एवं जागरूकता अभियान चलाते हुए ग्रामीणों की विभिन्न समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए।

जवानों का मनोबल - नक्सल अभियान में तैनात जवानों द्वारा क्षेत्र में बेहतर और साहसिक कार्य करने पर इनाम देने की बात कही है। जवानों को तनावमुक्त रखने एवं क्षमताओं में वृद्धि के लिए कैम्प परिसर में मनोरंजन के साधन उपलब्ध हो तथा जवानों को समय पर अवकाश दिया जाए।

श्री जीपी सिंह ने बताया कि ‘नक्सलियों के जनविरोधी कार्यों से लोग भली-भांति परिचित हो चुके हैं। यहां की जनता ने नक्सलियों को नकार दिया है।’’ उन्होनें इलाके में सक्रिय नक्सलियों से हथियार छोडकर समाज की मुख्यधारा में वापस लौटने की अपील की है और कहा है कि वे तत्काल आत्म-समर्पण करें, शासन की नीतियों के तहत् उनका पुनर्वास किया जाएगा। जो भी नक्सली आत्म-समर्पण करना चाहता है या कोई नक्सली गतिविधियों की सूचना/जानकारी देना चाहता है, वह मोबाइल नंबर 94791-92000 के माध्यम से आईजी दुर्ग से सीधे सम्पर्क कर सकता है।

बुधवार, 28 फ़रवरी 2018

12:05 pm

श्री जीपी सिंह, आईजी दुर्ग ने किया महिला पुलिस स्वयं सेवकों के 02 दिवसीय प्रशिक्षण का उद्घाटन

श्री जीपी सिंह, आईजी दुर्ग ने किया महिला पुलिस स्वयं सेवकों के 02 दिवसीय  प्रशिक्षण का उद्घाटन



श्री जीपी सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग रेंज द्वारा महिला पुलिस स्वयं सेवकों का 02 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम दिनांक 27/02/2018 को नेहरू सांस्कृतिक भवन, सेक्टर 01, भिलाई में प्रारंभ किया गया। श्री जीपी सिंह द्वारा पुलिस स्वयं सेवक महिलाओं को पुलिस परिवार मे शामिल होने के लिये बधाई दी।  

प्रशिक्षण का शुभारम्भ करते हुए उन्होनें कहा कि समाज को अग्रसर करने, समाज की कुरीतियों को हटाने एवं महिलाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए उनका कार्य महत्वपूर्ण है। आपके कार्य से महिलाओं मे सुदृढ़ता व पुलिस की क्षमता मे वृद्धि होगी। सभी स्वयं सेवक महिलाएँ अपना कार्य बिना झिझक के पूर्ण करें, पुलिस उनके साथ है। महिला पुलिस स्वयं सेवक अच्छा कार्य कर समाज में मिसाल कायम करें, ताकि यह योजना छत्तीसगढ़ सहित सम्पूर्ण भारत मे लागू हो सकें।

महिला पुलिस स्वयं सेवकों से समन्वय स्थापित करने हेतु थाना स्तर पर महिला पुलिस अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। नोडल अधिकारी, महिला पुलिस स्वयं सेवकों से प्राप्त सूचनाओं को थाना प्रभारी एवं पुलिस अधीक्षक को देंगे। 

शासन की योजना के अंतर्गत भर्ती महिला पुलिस स्वयं सेवकों को दो दिवसीय प्रशिक्षण में विशेषज्ञों द्वारा महिलाओं/बच्चों से संबंधित अपराध, सायबर अपराध, घरेलु हिंसा, प्रताडना, छेडखानी सहित कानून की संक्षिप्त जानकारी व पुलिस के साथ कार्य करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। 

कार्यक्रम के दौरान डाॅ. संजीव शुक्ला, पुलिस अधीक्षक दुर्ग, श्री भोजराज पटेल, नगर पुलिस अधीक्षक, दुर्ग एवं जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर पद्मश्री शमशाद बेगम ने महिला पुलिस स्वयं सेवकों को प्रोत्साहित किया व गीत के माध्यम से उन्हे अच्छा कार्य करने का संदेश दिया।

11:55 am

आईजी श्री जी.पी. सिंह ने पदोन्नति प्राप्त उप पुलिस अधीक्षक को स्टार लगाकर बधाई दी

आईजी श्री जी.पी. सिंह ने पदोन्नति प्राप्त उप पुलिस अधीक्षक को स्टार लगाकर बधाई दी 

राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश दिनांक 22/02/2018 के तहत् राज्य के 43 निरीक्षकों को उप पुलिस अधीक्षक के पद पर तथा 04 निरीक्षक (अंगुली चिन्हको उप पुलिस अधीक्षक (अंगुली चिन्हके पद पर प्रमोशन दिया गया है उक्त आदेश से पदोन्नति प्राप्त दुर्ग रेंज के 05 निरीक्षक श्री जगदीश उईकेश्री पूरन किशोर साहूश्री आदित्य कुमार शर्माश्री महेश कुमार सिन्हा एवं श्री सोनूराम पठारे का आज दिनांक 24/02/2018 को पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय दुर्ग में आईजी श्री जी.पीसिंह ने स्टार लगाकर उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। 

उन्होनें उप पुलिस अधीक्षक के पद पर आने वाले कर्तव्य/जिम्मेदारियों के बेहतर तरीके से निर्वहन करने टिप्स दिए तथा स्मार्ट तरीके से पुलिसिंग करते हुए आम लोगों में पुलिस के प्रति आदर्श रूप को प्रस्तुत करने का सुझाव दिया।

शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

6:01 pm

विभागीय जाॅच के दौरान नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन हो - आईजी दुर्ग


विभागीय जाॅच के दौरान नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन हो - आईजी दुर्ग 

श्री जी.पीसिंहपुलिस महानिरीक्षकदुर्ग रेंज द्वारा दिनांक 23.02.2018 को जिला दुर्ग में लंबित विभागीय जांच प्रकरणों के त्वरित निराकरण के संबंध में जिले के समस्त विभागीय जाॅचकर्ता अधिकारियों की मीटिंग आयोजित कर निम्नानुसार निर्देश दिए गए:-

आईजी दुर्ग द्वारा लंबित विभागीय जांच की समीक्षा करते हुए विभागीय जांच में होने वाली व्यवहारिक त्रुटियों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए विभागीय जांच में  रही समस्याओं/दिक्कतों की जानकारी हासिल कर जाॅच एवं निराकरण के प्रभावी तरीके अपनाने के टिप्स दिए।

विभागीय जाॅच के दौरान नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए अपचारी पुलिसकर्मी को अपना पक्ष रखने का अवसर देने तथा जाॅच के दौरान संबंधित नियमों का पालन करते हुए एक निश्चित समयावधि के भीतर विभागीय जांच को पूर्ण करने का लक्ष्य दिया गया। असहयोगात्मक रवैय्या अपनाने वाले अपचारी पुलिसकर्मियों के विरूद्ध पुलिस रेग्युलेशन में निहित प्रावधान के तहत नियमानुसार एकपक्षीय कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया।

श्री जी.पीसिंह द्वारा बताया गया कि ‘‘रेंज अधीन जिलों में लंबित विभागीय जांच को त्वरित गति देने के लिए रेंज अधीन जिलों के विभागीय जांचकर्ता अधिकारियों की एक अभियान के रूप में जिलावार बैठक ली जायेगी तथा समय-समय पर विभागीय जाॅच प्रगति की नियमित रूप से समीक्षा की जायेगी।’’


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